Myths and Facts about IVF in Hindi

विज्ञान ने बांझपन के इलाज के क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। 1980 के दशक के बाद से आई वी एफ निःसंतान दम्पत्तियों के लिए आशा की सबसे किरण के रूप में सामने आया है। आई वी एफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्निक की एक तकनीक है। हालांकि इसके आलावा और भी अन्य प्रकार की ART की तकनीकें आज के समय में मौजूद है, लेकिन आई वी एफ दम्पत्तियों द्वारा सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाला बांझपन उपचार माना जाता है।
IVF myths and facts in Hindi

पिछले कुछ वर्षों में आई वी एफ की सफलता दर में प्रभावशाली वृद्धि हुई है। आई वी एफ की मदद से अनगिनत निःसंतान दम्पत्तियों के माता पिता बनने का सपना पूरा हुआ है। फिर भी, अधिकांश अन्य लोगों में पूर्ण जानकारी के अभाव से बांझपन उपचार के विकल्पों, विशेष रूप से आई वी एफ उपचार के बारे में कई गलत धारणाएं और मिथक हैं। और उसके पीछे की हकीकत ज़्यादातर लोग नहीं जानते हैं।

 

आईवीएफ के मिथक और तथ्य

मिथक 1: क्या आईवीएफ के जरिए पैदा हुआ शिशु सामान्य होता है?

सबसे बड़ा सवाल अक्सर सामने आता है, कि क्या आईवीएफ के जरिए पैदा हुआ शिशु सामान्य होता है? क्यों उठता है ये सवाल?

यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि इसमें अंडों के फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती। इसमें अंडों को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। फिर 2 से 5 दिन के भ्रूण यानि एम्ब्र्यो को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

तथ्य: भले ही एम्ब्र्यो को लैब में तैयार किया जाता है, लेकिन एम्ब्र्यो का पूरा विकास माँ के गर्भ में होता है। एम्ब्र्यो का विकास उसी तरह होता है, जैसे एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी में होता है। इसलिए आई वी एफ के जरिए गर्भवती हुई महिला को पूरा वही अनुभव होता है, जो एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी में होता है। बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक प्रेग्नेंसी में बच्चे का होता है। बच्चे का जन्म भी बिल्कुल नैचुरल तरीके से होता है। इसलिए यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि आई वी एफ बेबी नॉर्मल नहीं होते। ये बेबी पूरी तरह से नॉर्मल होते हैं।

मिथक 2: आई वी एफ प्रेग्नेंसी में सिजेरियन से ही बच्चे का जन्म होता है।

तथ्य: आई वी एफ में सिर्फ फर्टिलाइज़ेशन की प्रक्रिया शरीर से बहार की जाती है यानि एम्ब्र्यो को तैयार लैब में किया जाता है। इसका विकास उसी तरह गर्भाशय में होता है, जैसा कि सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। इसलिए इसमें सिजेरियन की उतनी ही संभावना होती है, जितनी कि एक सामान्य गर्भधारण में होती है।

मिथक 3: आई वी एफ से गर्भपात की संभावना अधिक होती हैं।

तथ्य: सामान्य तरीके से हुए गर्भधारण में भी गर्भपात की संभावना होती है। आई वी एफ गर्भपात के खतरे को नहीं बढ़ाता है। आई वी एफ के बाद गर्भपात की दर सामान्य यानि नेचुरल गर्भावस्था के बाद की तुलना में अधिक नहीं होती है, लेकिन फिर भी गर्भपात होने की संभावना हो सकती है।

मिथक 4: आई वी एफ के बच्चे में जन्म दोष होने की संभावना होती है।

तथ्य: आई वी एफ के बच्चे पूरी तरह से सामान्य बच्चे की तरह ही होते है। उनमें आई वी एफ के कारण कोई जन्म दोष होने की संभावना नहीं होती है। शिशु में किसी भी प्रकार का जन्म दोष होना किसी जेनेटिक कारण की वजह से हो सकता है जिसको एडवांस्ड तकनीकों का प्रयोग करके रोका जाना संभव है।

मिथक 5: आई वी एफ के बच्चो में समय से पहले जन्म और जन्म के समय कम वजन की संभावना अधिक होती है।

तथ्य: एक सामान्य गर्भावस्था की तरह आई वी एफ की प्रेगनेंसी में भी शिशु कम वजन के साथ पैदा हो सकता है या फिर समय से पहले बच्चे का जन्म हो सकता है। पर यह भी अब पहले से फ्रीज हुए भ्रूण यानि एम्ब्र्यो फ्रीजिंग की प्रक्रिया का आई वी एफ में उपयोग करके कम वजन की समस्या का निवारण किया जा सकता है।

मिथक 6: आई वी एफ केवल युवा दंपतियों के लिए ही उपयोगी होता है।

तथ्य: इस तकनीक से अधिक उम्र की महिलाओं, यहाँ तक कि मेनोपॉज के बाद भी महिलाओं का गर्भधारण हो सकता है। मेनोपॉज वाली महिलाओं को इसके लिए डोनर अंडों की जरूरत पड़ सकती है।

मिथक 7: आई वी एफ के बाद महिला को 9 महीने के लिए बेड रेस्ट करना होता है।

तथ्य: आई वी एफ केवल गर्भधारण होने की प्रक्रिया है। एक बार भ्रूण के गर्भाशय में ट्रांसफर होने के बाद बच्चे का विकास उसी तरह होता है, जैसा सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। यानी डॉक्टर जो काम सामान्य प्रेग्नेंसी में करने की अनुमति देते है, वही काम प्रेग्नेंट महिला अपने डॉक्टर की सलाह से आई वी एफ से हुई प्रेग्नेंसी के दौरान भी कर सकती है।

मिथक 8: आई वी एफ उपचार के लिए रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है।

तथ्य: हालांकि, अंडों को निकालने के लिए रोगी को सिर्फ कुछ घंटों के लिए भर्ती करने की आवश्यकता होती है। भ्रूण स्थानांतरण यानि एम्ब्र्यो ट्रांसफर की प्रक्रिया में 10-15 मिनट लगते हैं, लेकिन आप आधे घंटे आराम कर सकते हैं।

मिथक 9: आई वी एफ सुरक्षित नहीं है।

तथ्य: इसके पीछे का सच यह है कि आई वी एफ काफी सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें बहुत ही कम जटिलताएं होती हैं। ओवरियन हाइपरसिमुलेशन सिंड्रोम, जो वजन बढ़ने या पेट में गड़बड़ी का कारण बन सकता है या अंडा पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के दौरान कुछ मामूली रक्तस्राव की समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन ये जटिलताएं बहुत कम हैं और बहुत कम लोगों को प्रभावित करती हैं।

मिथक 10: आई वी एफ से बढ़ता है कैंसर का खतरा।

तथ्य: IVF से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक ये है कि IVF ट्रीटमेंट करवाने से जब महिलाओं के शरीर में अधिक FSH यानि फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन डाला जाता है तो इससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। विज्ञान ने इस बात को भी गलत साबित किया है। रिसर्च के अनुसार IVF करवाने से किसी भी तरह के कैंसर को बढ़ावा नहीं मिलता है।

आईवीएफ के लिए मेडिकवर फर्टिलिटी एक अच्छा विकल्प है।

मेडिकवर फर्टिलिटी एक अंतरार्ष्ट्रीय फर्टिलिटी क्लिनिक हैं। यहाँ एडवांस्ड तकनीकों और आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से इलाज की प्रक्रिया की जाती है और यहाँ के डॉक्टर ही अनुभवी और उच्च सफलता दर के ट्रीटमेंट देने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

मेडिकवर फर्टिलिटी में आर आई विटनेस (RI Witness) का प्रयोग किया जाता है। आई वी एफ लैब में होने वाली संभावित किसी भी प्रकार की गलतियों को रोकने में आरआई विटनेस से मदद मिलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है की एम्ब्र्यो के लिए आपका ही सैंपल (एग और स्पर्म) का प्रयोग किया गया है। लोगों में आजकल इसके बारे में फिल्मों को देखने के बाद काफी जागरूकता बढ़ गई है। मेडिकवर फर्टिलटी में यह सुविधा पहले से ही उपलबध है, जिसका लाभ कई दम्पत्तियों को मिला है।

यदि आपको इस विषय से सबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इस नंबर पर +917862800700 संपर्क कर सकते है। 

लेखक Dr. Sweta Gupta