IVF Ki Safalta Dar

आईवीएफ यानि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) की एक तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाशय से अंडे को निकालकर, उसे पुरुष के शुक्राणु के साथ लैब में फर्टिलाइज़ किया जाता है। फर्टिलाइज़्ड होने के बाद तैयार हुए भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

सबसे पहला सफल आईवीएफ उपचार वर्ष 1978 में किया गया था। यह पहल निःसंतानता की समस्या से पीड़ित निःसंतान दंपतियों को समाधान प्रदान करने के इरादे से की गई थी। आजकल के समय में आईवीएफ उपचार व्यावहारिक रूप से बहुत आम हो गया है। आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद से लाखों स्वस्थ बच्चों का जन्म हुआ है। यह इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे निःसंतान दम्पत्तिओं के लिए एक सफल ट्रीटमेंट के रूप में माना जाता है। उच्च सफलता दर, एडवांस्ड ट्रीटमेंट और आधुनिक प्रयोगशालाओं के उपयोग से अनगिनत दम्पत्तिओं के माता-पिता बनने के सपने को आईवीएफ के द्वारा पूरा किया जा रहा है।

आईवीएफ की प्रकिया

  • महिलाओं के अंडाशय में अंडो को बढ़ाने के लिए इंजेक्शन (उत्तेजक औषधि) दिया जाता है, जिससे एक से ज़्यादा अंडो मिल सके। ज़्यादा अंडों से आईवीएफ के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • इंजेक्शन के 10 से 12 दिन के बाद, एक विशेष सक्शन क्रियाविधि की मदद से विकसित अंडो को बहार निकाला जाता है। अंडों को निकालने के बाद, भ्रूणविज्ञानी यानि एम्ब्रियोलॉजिस्ट अंडों की संख्या की पहचान एक माइक्रोस्कोप की मदद से करते हैं।
  • अंडो को प्राप्त करने के बाद, पुरुष के शुक्राणु का सैंपल लिया जाता है। इस सैम्पल को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। जहाँ शुक्राणु के सैंपल को करके सबसे अच्छे और स्वस्थ शुक्राणु का चयन करते है।
  • उसके बाद फर्टिलाइज़ेशन की प्रक्रिया की जाती है। एक अंडे को फर्टिलाइज़ करने के दो तरीके हैं, इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF), जहाँ फर्टिलाइज़ेशन के लिए अंडे और शुक्राणु को एक पेट्रीडिश में रखा जाता है; या इंट्रासाइटोप्लाज़मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) जिसमें एक शुक्राणु को अंडे के साइटोप्लाज्म में इंजेक्ट किया जाता है।
  • अंडे और शुक्राणु के फर्टिलाइज़ेशन के बाद तैयार हुए भ्रूण को इनक्यूबेटर में रखा जाता है, जहाँ भ्रूण को विकसित होने और बढ़ने के लिए उचित वातावरण प्रदान किया जाता है। फर्टिलाइज़ेशन के बाद पाँचवे दिन भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट चरण में विकसित हो जाता है।
  • एक बार जब भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट चरण में विकसित हो जाता है, तो इसे कैथेटर का उपयोग करके गर्भाशय में ट्रांफर किया जाता है।

आईवीएफ की सफलता दर

आईवीएफ की सफलता की दर सभी आईवीएफ प्रक्रियाओं का एक अनुकूल परिणाम होता है।

आईवीएफ (IVF) की सफलता दर कुछ कारणों पर निर्भर करती है जैसे की-

  • महिला की उम्र- कम उम्र वाली महिलाओं में आईवीएफ की सफलता दर अधिक होती है।
  • पुरानी चिकित्सा इतिहास (past medical history) पर आईवीएफ की सफलता दर निर्भर करती है।
  • इनफर्टिलिटी का कारण और समय अवधि यानि कितने समय से इनफर्टिलिटी की समस्या है।
  • अंडे और शुक्राणु की क्वालिटी जितनी अच्छी होती है, आईवीएफ की सफलता दर भी उतनी अच्छी होती है।
  • एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ पर आईवीएफ की सफलता दर काफी हद तक निर्भर करती है, क्योंकि जांच से लेकर, सभी टेस्ट और कौन सा आईवीएफ ट्रीटमेंट आपके लिए ठीक रहेगा, यह सब एक डॉक्टर पर निर्भर करता है।
  • एक एम्ब्रियोलॉजिस्ट पर आईवीएफ की सफलता दर काफी हद तक निर्भर करती है, क्योंकि शुक्राणु और अंडे के फर्टिलाइज़ेशन से लेकर भ्रूण के गर्भाशय में ट्रांसफर होने तक, सब कुछ एक भ्रूणविज्ञानी पर निर्भर करता है।
  • लैब पर भी आईवीएफ की सफलता दर काफी हद तक निर्भर करती है, जैसे की लैब में आधुनिक उपकरणों और एडवांस्ड तकनीकों के प्रयोग से आईवीएफ की सफलता दर में वृद्धि होती है। साथ ही भ्रूण को उचित वातावरण प्रदान करना भी लैब पर निर्भर करता है।

कुछ अन्य कारक भी है जो आईवीएफ की सफलता को प्रभावित कर सकते है:-

  • बायोलॉजिकल (जैविक) कारक- जैसे कि ओव्यूलेशन डिसऑर्डर, समय से पहले डिम्बग्रंथि विफलता (ovarian failure), गर्भाशय फाइब्रॉएड वाली महिलाएं, या ख़राब स्पर्म क्वालिटी वाले पुरुष आदि।
  • हार्मोनल असंतुलन- थायराइड और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) जैसी समस्याओं से आईवीएफ ट्रीटमेंट की सफलता में काफी प्रभाव पड़ सकता है।
  • आवर्तक गर्भपात- जिसे एक या अधिक गर्भधारण के नुकसान के रूप में परिभाषित किया गया है, महिला के गर्भ धारण करने की क्षमता को प्रभावित करता है।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब का पुरुषों और महिलाओं दोनों की फर्टिलिटी पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • मोटापा- अधिक वजन या मोटापा होने से आईवीएफ उपचार की सफलता दर पर एक मजबूत प्रभाव पड़ सकता है।

मेडिकवर फर्टिलिटी सबसे अच्छे आईवीएफ क्लीनिकों में से एक है।

मेडिकवर फर्टिलिटी एक अंतराष्ट्रीय फर्टिलिटी क्लिनिक हैं। यहाँ एडवांस्ड तकनीकों और उपकरणों के प्रयोग से जाँच की प्रक्रिया की जाती है। मेडिकवर फर्टिलिटी ने आईवीएफ के कई सफल ट्रीटमेंट किए है, जिससे अनगिनत निःसंतान दम्पत्तिओं के माता-पिता बनने का सपना पूरा हुआ है। यहाँ के फर्टिलिटी डॉक्टर और एम्ब्रियोलॉजिस्ट बहुत ही अनुभवी और उच्च सफलता दर के ट्रीटमेंट देने में पूरी तरह से सक्षम हैं। साथ ही मेडीकवर फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाती है।

मेडिकवर फर्टिलिटी में आर आई विटनेस (RI Witness) का प्रयोग किया जाता है। आई वी एफ लैब में होने वाली संभावित किसी भी प्रकार की गलतियों को रोकने में आरआई विटनेस से मदद मिलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है की एम्ब्र्यो के लिए आपका ही सैंपल (एग और स्पर्म) का प्रयोग किया गया है। लोगों में आजकल इसके बारे में फिल्मों को देखने के बाद काफी जागरूकता बढ़ गई है। मेडिकवर फर्टिलटी में यह सुविधा पहले से ही उपलबध है, जिसका लाभ कई दम्पत्तियों को मिला है।

यदि आपको इस विषय या इनफर्टिलिटी से से सबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इस नंबर पर 7862800700 संपर्क कर सकते हैं।

Faqs

प्रश्न: पहली कोशिश में आईवीएफ की सफलता दर क्या है?

उत्तर: 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए पहली कोशिश में आईवीएफ द्वारा गर्भवती होने में सक्षम होने का राष्ट्रीय औसत 55% है। हालांकि, जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, यह संख्या लगातार कम होती जाती है।

प्रश्न: क्या बेड रेस्ट इम्प्लांटेशन में मदद करता है?

उत्तर: इम्प्लांटेशन रेट को बढ़ाने के लिए बिस्तर पर आराम की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि गर्भावस्था के परिणाम में सुधार के लिए बिस्तर पर आराम एक प्रभावी रणनीति हो सकती है।

लेखक Dr. Sweta Gupta