PCOD in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम/ पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर (PCOD in Hindi) महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है। आजकल की आधुनिक जीवनशैली के कारण यह समस्या काफी बढ़ गई है। जिसके कारण लाखों से भी अधिक महिलाएं पीसीओडी की समस्या से प्रभावित है।
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पीसीओडी क्या है? (What is PCOD in Hindi?)

पीसीओडी (PCOD) यानि पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (PCOD in Hindi) की समस्या आमतौर पर महिलाओं के अंदर हॉर्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) होने के कारण होती है। इसमें महिला के शरीर में पुरुष हार्मोन एण्ड्रोजन (Male Hormone Androgen) का लेवल बढ़ जाता है और अंडाशय (Ovary) पर सिस्ट बनने लगते हैं।

सामान्य तौर पर मनुष्यों में शरीर की सभी प्रक्रियाओं के सही तरह से काम करने के लिए "पुरुष" और "महिला" दोनों हार्मोन की आवश्यकता होती है, लेकिन पीसीओडी वाली महिला में बहुत अधिक पुरुष हॉर्मोन की मात्रा सामान्य से ज़्यादा बढ़ जाती हैं। जिस कारण से अंडाशय में समस्या पैदा होने लगती है और साथ ही अनियमित पीरियड्स की समस्या भी हो सकती है।

पीसीओडी के लक्षण (PCOD Ke Lakshan)

  • अनचाही जगहों में बालों का विकास - महिला में पुरुष हॉर्मोन एण्ड्रोजन ज़्यादा बनने की वजह से शरीर में काफी बदलाव आ सकते है जैसे की चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर ज़्यादा बाल उगना। शरीर और चेहरे पर सामान्य से ज़्यादा बालों के उगने को अतिरोमता यानि "Hirsutism" कहते है। इसमें चेहरे या ठोड़ी, स्तनों, पेट, या अंगूठे और पैर की उंगलियों जैसे स्थानों पर अनचाहे बाल उग सकते हैं।
  • बालों का झड़ना - शरीर में एण्ड्रोजन हॉर्मोन की मात्रा बढ़ने से सिर के बाल पतले हो सकते है और जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है।
  • वजन बढ़ना - पीसीओडी के कारण महिलाएं वजन बढ़ने की समस्या के साथ संघर्ष करती हैं या फिर उन्हें वजन कम करने में मुश्किलें होती है।
  • मुंहासे या तैलीय त्वचा - पीसीओडी की समस्या में होने वाले हार्मोन परिवर्तन के कारण पिंपल और तैलीय त्वचा की समस्या हो सकती है।
  • सोने में परेशानी - पीसीओडी की समस्या में सोते समय परेशानी और हर समय थकान महसूस हो सकती है। साथ ही हॉर्मोन के परिवर्तन के कारण सिर दर्द की समस्या भी हो सकती है।
  • गर्भवती होने में परेशानी - पीसीओडी बांझपन के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • पीरियड्स की समस्याएं - पीसीओडी के कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या कई महीनों तक पीरियड्स आना बंद हो जाते है। या फिर पीरियड्स के दौरान बहुत भारी ब्लीडिंग हो सकती है।

PCOD के लक्षण हर महिला के लिए अलग हो सकते हैं। यदि इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आएं तो तुरंत अपनी दिनचर्या में बदलाव लाए, साथ ही डॉक्टर से परामर्श लें।

पीसीओडी का निदान कैसे किया जाता है?

कोई भी एक टेस्ट पीसीओडी की उपस्थिति का निर्धारण नहीं कर सकता है। डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों के बारे में पूछ सकते है और शारीरिक जाँच और ब्लड टेस्ट के ज़रिए हॉर्मोन, कोलेस्ट्रॉल और ग्लूकोज की जाँच की मदद से इस समस्या का निदान किया जा सकता है। इनके अलावा अल्ट्रासाउंड का उपयोग गर्भाशय और अंडाशय को देखने के लिए किया जा सकता है।

  • शारीरिक जाँच

इसमें डॉक्टर आपके ब्लड प्रेशर, बी एम आई (बॉडी मास इंडेक्स), और कमर के आकार की जांच कर सकता है। साथ ही अनचाही जगहों पर बालों के विकास, मुँहासे के लिए वह आपकी त्वचा को देख सकता है।

  • पेल्विक जाँच

इसमें डॉक्टर नार्मल चेकअप करते हैं। डॉक्टर योनि, गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय जैसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की असामान्य चीज़ की जाँच करेगा।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राम)

डॉक्टर आपके अंडाशय में सिस्ट और गर्भाशय की परत की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कर सकते है। यदि आपके पीरियड्स नहीं हो रहे है तो आपकी गर्भाशय की परत सामान्य से अधिक मोटी हो सकती है। पीसीओडी की समस्या में अंडाशय सामान्य से 1½ से 3 गुना बड़े हो सकते है।

पीसीओडी उपचार

पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर का कोई विशेष इलाज नहीं है। पीसीओडी का उपचार इसके लक्षणों को कम व खत्म करने और आगे की मुश्किलों को रोकने के उद्देश्य से किया जाता है। उपचार व्यक्तिगत महिला के लक्षणों पर निर्भर करता है।

कुछ पीसीओडी उपाय जो लक्षणों को कम और खत्म करने में मदद कर सकते है, जैसे-

स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतें

  • आप अच्छी तरह से खाएं और नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • पीसीओडी के साथ कई महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से परेशान हैं। शरीर के वजन का सिर्फ 5% से 10% कम होने पर कुछ लक्षणों से राहत मिल सकती है। यह आपके पीरियड्स को और अधिक नियमित बनाने में भी मदद करता है। साथ ही ओव्यूलेशन की समस्याओं को ठीक करने में भी मदद मिलती है।
  • हालाँकि, पीसीओडी से डायबिटीज हो सकता है, इसलिए आपका डॉक्टर आपको स्टार्च या शुगर वाले यानि मीठे खाद्य पदार्थों को सीमित करने के लिए कह सकता है। इसके बजाय, उन खाद्य पदार्थों और भोजन का सेवन करें जिनमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है।
  • रोज व्यायाम करें क्योंकि व्यायाम इंसुलिन को भी नियंत्रित करने में मदद करता है और वजन कम करने में भी मदद मिलेगी।

दवाइयां

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों के सेवन से हार्मोन को संतुलन किया जा सकता है जिससे पीसीओडी की समस्या से राहत मिल सकती है।
  • प्रोजेस्टिन हार्मोन लेने से आपके पीरियड्स नियमित होने में मदद मिल सकती है। यह गर्भाशय के कैंसर की संभावना को भी कम कर सकता है।
  • मेटफॉर्मिन (फोर्टमेट, ग्लूकोफेज) इंसुलिन के स्तर को कम कर सकता है। साथ ही वजन घटाने, फर्टिलिटी बढ़ाने और टाइप 2 डायबिटीज होने से रोक सकता है।

पीसीओडी डाइट

एक महिला के लिए पीसीओडी के लक्षणों को कम या खत्म करने के लिए सबसे ज़रूरी होता है अपने खाने का ध्यान रखना।

भोजन सही समय पर कीजिए। साथ ही आहार में पौष्टिक तत्वों का सेवन करना चाहिए। जंक फ़ूड, मीठा, तैलिय पदार्थ, कोल्डड्रिंक आदि का सेवन ना करें। यदि बंद नहीं कर सकते तो धीरे-धीरे इनका सेवन कम कर दें।

PCOD होने पर आप अपनी डाइट में यह बदलाव कर सकती है –

  • कम कार्बोहाइड्रेट्स वाले भोजन का सेवन करें और ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट्स से भरे हुए खाने से परहेज़ करें जैसे की चीनी, मिठाई, नमकीन और ब्रेड
  • संतुलित आहार लें, कोशिश करें की आहार में प्रोटीन की मात्रा अधिक लें जैसे पनीर, अण्डे, मांस या मछली का सेवन करें
  • होल ग्रेन्स जैसे की भूरे चावल, रागी या ओट्स खाएँ
  • फाइबर युक्त चीज़ों का सेवन करें जैसे की फल, स्प्राउट्स और सलाद
  • दालचीनी का सेवन करें क्योंकि यह शरीर में इंसुलिन लेवल (Insulin Level) को बढ़ने से रोकने में सक्षम है
  • जिन खाद्य पदार्थों में ग्लाइसेमिक (Glycemic) की मात्रा ज़्यादा हो, उनका परहेज़ करें जैसे की आलू, सफ़ेद ब्रेड आदि
  • मुलहठी के सेवन से महिला के शरीर में मौजूद पुरुष हार्मोन में कमी आने लगती है जिससे पीसीओडी की समस्या में राहत मिलती है।
  • धूम्रपान व् शराब का सेवन बंद करें

पीसीओडी और फर्टिलिटी

पीसीओडी के सबसे आम कारणों में से एक है महिला को गर्भवती होने में परेशानी होती है।

पीसीओडी में होने वाले हॉर्मोन परिवर्तन के कारण महिला के प्रजनन प्रणाली में समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही अंडाशय सामान्य से बड़े हो जाते है और सिस्ट भी बनने लगते हैं। पीसीओडी के कारण ओवुलेशन समस्याएं भी हो सकती है। एण्ड्रोजन के बढ़े हुए लेवल से अंडों के विकास और अंडों को नियमित रूप से अंडाशय से बहार आने में दिक्कते होती है। जिससे एक महिला की फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है।

पीसीओडी और गर्भधारण

यदि आपको पीसीओडी की समस्या है और आप गर्भवती होना चाहती हैं, तो आपको एक फर्टिलिटी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ आपको सही दवाइयों की सलाह देगा। साथ ही नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड की मदद से आपकी जांच करेगा।

पीसीओडी की समस्या में आई वी एफ की मदद से गर्भधारण किया जा सकता है। आई वी एफ ट्रीटमेंट से पहले हार्मोनल असंतुलन को दवाइयों की मदद से नियंत्रण किया जाता है। उसके बाद आई वी एफ की प्रक्रिया की जाती है। आई वी एफ की प्रक्रिया में अंडे को शुक्राणु के साथ लैब में निषेचित किया जाता है और निषेचन की प्रक्रिया के बाद जो भ्रूण बनता है उसे महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

पीसीओडी की सफल कहानी (PCOD Success Story in Hindi)

मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गयी थी। शादी के चार साल बाद तक भी जब बच्चा नहीं हुआ, तब हमने एक डॉक्टर के पास जाने का फैसला लिया। डॉक्टर ने मेरी जांच की और जांच से पता चला, मुझे पीसीओडी की बीमारी थी। इसी कारण से मेरा गर्भधारण नहीं हो रहा था। डॉकटर ने हमें एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह दी।

इंटरनेट पर ढूंढ़ने पर हमें मेडिकवर फर्टिलिटी के बारे में पता चला और अगले दिन ही हम वहां गए। हमने डॉक्टर को अपनी सारी समस्या बताई और फिर डॉक्टर ने हमारे कुछ टेस्ट करवाए। टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने हमें आई वी एफ की सलाह दी।

हमने अपने घरवालों की अनुमति के साथ इलाज शुरू कर दिया और कुछ समय के बाद हमें खुशखबरी मिली। मेडिकवर फर्टिलिटी ने मेरे माँ बनने के सपने को पूरा किया है। मैं मेडिकवर फर्टिलिटी की डॉक्टर और पुरे स्टाफ को धन्यवाद कहना चाहती हूँ।

पीसीओडी के बावजूद गर्भधारण के लिए मेडिकवर फर्टिलिटी एक अच्छा विकल्प है।

मेडीकवर फर्टिलिटी एक अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी क्लिनिक है। साथ ही यहाँ आधुनिक उपकरणों से इलाज की प्रक्रिया की जाती है। यहाँ के डॉक्टर सभी तरह के ट्रीटमेंट करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। साथ ही मेडीकवर फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाती है।

पीसीओडी वाली महिलाओं को उनके हार्मोनल असंतुलन के कारण गर्भधारण होने में समस्या आ सकती है। जो महिलाएं बांझपन की समस्या के कारण माँ बनने के सुख से वंचित हैं, उन महिलाओं के लिए आई वी एफ ट्रीटमेंट किया जाता है। मेडीकवर फर्टिलिटी ने कई आई वी एफ के सफल ट्रीटमेंट किए हैं, जिनसे कई लोगों को माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ है।

यदि आपको इस विषय से सबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इस नंबर पर  +91 8929-000-288  संपर्क कर सकते हैं।

FAQs

प्रश्न: क्या पीसीओडी का इलाज संभव है? (Is PCOD Curable?)

उत्तर: पीसीओडी का अभी तक कोई ठोस इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव, संतुलित आहार, नियमित तौर पर व्यायाम और दवाइयों से आप पीसीओएस के लक्षणों को कम या खत्म कर सकती हैं और बेहतर महसूस कर सकती हैं।

प्रश्न: क्या PCOD रोगी गर्भवती हो सकती है? (Is PCOD Patient Get Pregnant?)

उत्तर: पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर महिला बांझपन के सबसे आम कारणों में से एक है। लेकिन आप पीसीओडी की समस्या में गर्भवती हो सकती हैं, पर इसकी संभावना बहुत कम होती है। पीसीओडी में आई वी एफ की मदद से गर्भधारण किया जा सकता है।

प्रश्न: क्या पीसीओडी आनुवंशिक समस्या है? (Is PCOD Genetic?)

उत्तर: हाँ, पीसीओडी की बीमारी अनुवांशिक यानि जेनेटिक कारण से हो सकती है। जिनके परिवार में कुछ महिलाओं को PCOD हो चुका है उनको यह बीमारी होने की सम्भावना ज़्यादा होती है।