Garbhpat

गर्भपात की समस्या एक बहुत ही आम बात है। किसी भी महिला के जीवन में यह स्थिति वास्तव में एक बहुत ही निराशाजनक होती है। गर्भपात होने के बाद दूसरी बार गर्भधारण के लिए महिला को मानसिक व् शारीरिक रूप से तैयार होने की आवश्यकता होती है।
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गर्भपात क्या है?

जब गर्भावस्था (Pregnancy) के 20वें सप्ताह से पहले गर्भ में भ्रूण की मृत्यु हो जाए, तो उसे गर्भपात यानि मिसकैरेज (Miscarriage) कहा जाता है। और लगातार 3 या उससे ज़्यादा बार गर्भपात होने पर उसे रीकरन्ट मिसकैरेज (Recurrent Miscarriage) कहते हैं।

पांच में से एक प्रेगनेंसी, मिसकैरेज में खत्‍म हो जाती है। ज़्यादातर मामलों में, महिलाओं को प्रेगनेंसी के बारे में पता होने से पहले ही गर्भपात हो जाता है।

गर्भपात के प्रकार
  • मिस्ड गर्भपात (Missed Abortion): इसमें गर्भावस्था खुद से खत्म हो जाती है, लेकिन नाल और भ्रूण गर्भाशय में मौजूद होते हैं। इसमें ना कोई रक्तस्राव होता है और ना ही किसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। इसका पता अल्ट्रासाउंड से किया जाता है।
  • अधूरा गर्भपात (Incomplete Abortion): इसमें महिला को योनि से रक्तस्राव और पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द जैसे लक्षण महसूस होते है। इसमें भ्रूण का कुछ ही भाग बाहर आ पाता है, इसलिए इसे अधूरा गर्भपात कहा जाता है।
  • पूर्ण गर्भपात (Complete Abortion): इसमें गर्भाशय से भ्रूण पूरी तरह से बाहर आ जाता है।
  • अपरिहार्य गर्भपात (Inevitable Abortion): इसमें रक्तस्राव होने के साथ गर्भाशय ग्रीवा खुल जाती है, जिससे भ्रूण बाहर आ जाता है। इस दौरान महिला को पेट में लगातार ऐंठन हो सकती है।
  • संक्रमित (सेप्टिक) गर्भपात:  इसमें संक्रमण यानि इन्फेक्शन होने के कारण से गर्भपात हो जाता है।

गर्भपात के लक्षण (Garbhpat Ke Lakshan)

  • सबसे आम लक्षण है पेट में ऐंठन या दर्द होना। यह दर्द पीरियड्स में होने वाले दर्द के सामान होता है। कभी-कभी यह पीरियड्स के सामान्य दर्द से भी अधिक हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के समय पर योनि (Vagina) से ब्लीडिंग या हलकी स्पॉटिंग होना, ब्लीडिंग के साथ ब्लड क्लॉट्स भी कहते हैं और यह ब्लीडिंग लाल या भूरे रंग की हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के लक्षणों का कम हो जाना जैसे स्तनों में दर्द होना, उलटी आना आदि।
  • पीठ में बहुत ज़्यादा दर्द होना।
  • गर्भावस्था में रक्तस्राव होना।

गर्भपात के कारण (Garbhpat Ke Karan in Hindi)

गर्भपात होने के कारण (Garbhpat Hone Ke Karan) हो सकते है जैसे-

  • आनुवंशिक/ क्रोमोसोमल असामान्यता (Genetic/Chromosomal Abnormality): माता या पिता दोनों में सी किसी एक या दोनों के क्रोमोसोम में किसी भी प्रकार की असामान्यता होना।
  • इम्यूनोलॉजिकल समस्याएं (Immunological Problems): कभी-कभी इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर जैसे अस्थमा, एलर्जी, ऑटोइंफ्लेमेटरी सिंड्रोम की समस्याएं होने के कारण से गर्भाशय (Uterus) में भ्रूण का इम्प्लांटेशन नहीं हो पाता है।
  • एंडोक्रिनोलॉजिकल डिसऑर्डर (Endocrinologcal Disorders): डायबिटीज, थाइरोइड, ऑस्टियोपोरोसिस और कुशिंग सिंड्रोम जैसी एंडोक्रिनोलॉजिकल डिसऑर्डर के कारण भी बार-बार गर्भपात की समस्या हो सकती है।
  • अगर अंडे या स्पर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं होती या फिर Embryo यानि भ्रूण ठीक से विकसित नहीं होता है।
  • प्रेगनेंसी का ठीक तरह से ना होना, यूटेरस में किसी प्रकार की समस्या हो या उसका आकार ठीक ना हो।
  • PCOS यानि Polycystic Ovary Syndrome की बीमारी में मिसकैरेज होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे गर्भधारण के लिए अंडे विकसित नहीं होते हैं।
  • योनि (Vagina) या श्रोणि (Pelvis) में इन्फेक्शन के कारण और पेट पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ने या चोट लगने के कारण से भी मिसकैरेज होने की सम्भावना हो जाती है।
  • महिला की अधिक उम्र: जो महिलाएं 35 वर्ष से ज्यादा उम्र में गर्भधारण की कोशिश करती हैं, उन्हें बार-बार गर्भपात हो सकता है।

गर्भपात का निदान कैसे किया जाता है?

इसकी जांच के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करते है, जैसे-

  • पेल्विक टेस्ट: इस टेस्ट के द्वारा डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा की जांच करते हैं।
  • अल्ट्रासाउंड: अल्ट्रासाउंड की मदद से भ्रूण के दिल की धड़कन की जांच की जाती है कि भ्रूण सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं।
  • ब्लड टेस्ट: ब्लड में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) के स्तर की जांच की जाती है। इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव एक समस्या का संकेत हो सकता है।
  • टिश्यू टेस्ट: डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा से बहार निकलने वाले टिशू की जाँच करते हैं।
  • क्रोमोजोम टेस्ट: क्रोमोजोम संबंधी समस्या की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है।

गर्भपात के लिए उपचार

  • सर्जरी: सर्जरी के द्वारा गर्भाशय की समस्याओं को ठीक किया जाता है।
  • हेपरिन और एस्पिरिन जैसी रक्त पतला करने वाली दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
  • प्रोजेस्टेरोन: प्रोजेस्टेरोन दवाओं या सप्लीमेंट्स का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक हार्मोन है।
  • आई वी एफ यानि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन के द्वारा बार-बार गर्भपात होने के बाद गर्भधारण करने में सहायता मिलती है।

आई वी एफ क्या है?

IVF - इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय (Ovary) से अंडे को निकालकर, उसे पुरुष के शुक्राणु के साथ लैब में फर्टिलाइज़ किया जाता है। फर्टिलाइज़ होने के बाद तैयार हुए भ्रूण को महिला के गर्भाशय (Uterus) में ट्रांसफर किया जाता है।

  • आई वी एफ के द्वारा हम अच्छे क्वालिटी के अंडे और स्पर्म को चुनते है जिससे अच्छी क्वालिटी का भ्रूण तैयार होता है, और इस तरह गर्भपात होने के आसार कम हो जाते है।
  • ट्रीटमेंट से पहले आनुवंशिक/ क्रोमोसोमल असामान्यता को दवाइयों द्वारा ठीक किया जाता है और फिर आई वी एफ की प्रक्रिया द्वारा गर्भधारण हो सकता है।
  • आई वी एफ ट्रीटमेंट से पहले किसी भी प्रकार की इम्यूनोलॉजिकल समस्याएं, एंडोक्रिनोलॉजिकल डिसऑर्डर या हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रण किया जाता है।
गर्भपात के बाद आई वी एफ के लिए मेडिकवर फर्टिलिटी एक अच्छा विकल्प है

मेडिकवर फर्टिलिटी यूरोप के सर्वश्रेष्ठ फर्टिलिटी क्लीनिकों में से एक है। साथ ही यहाँ आधुनिक उपकरणों से जाँच की प्रक्रिया की जाती है।

मेडिकवर फर्टिलिटी ने बार-बार गर्भपात की समस्या से पीड़ित बहुत सी महिलाओं के, माँ बनने के सपने को पूरा करने में उनकी मदद की है। यहाँ के डॉक्टर सभी तरह के ट्रीटमेंट करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हैं। साथ ही मेडिकवर फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाती है। इस विषय में किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप इस नंबर +917862800700 पर संपर्क कर सकते है।

गर्भपात के बाद गर्भधारण की सफल कहानी

मेरा नाम मोनिका है। हमारी शादी को 5 साल से भी ज़्यादा समय हो गया था। लेकिन फिर भी कई कोशिशों और इलाज के बाद भी हमारा एक बच्चे के साथ परिवार पूरा होने का सपना अधूरा था। बार-बार की कोशिशों के बाद प्रेगनेंसी तो हो रही थी लेकिन बार-बार गर्भपात हो जाता था।

एक दिन इंटरनेट सर्फ करते समय मुझे मेडीकवर फर्टिलिटी क्लिनिक के बारे में पता चला। मैंने इसके बारे में अपने पति को बताया और अगले दिन हम वहां गए।

डॉक्टर ने हमारी पूरी बात सुनने के बाद कुछ टेस्ट करवाए। टेस्ट की रिपोर्ट के बाद उन्होंने हमें आई वी एफ करवाने की सलाह दी।

आई वी एफ प्रक्रिया के ज़रिए ही हमें संतान का सुख मिला है। मेरी निराशा को आशा में बदलने के लिए मैं मेडीकवर फर्टिलिटी की बहुत आभारी हूँ।

FAQs

प्रश्न: आप गर्भपात की पुष्टि कैसे करते हैं? (How do you confirm a miscarriage?)

उत्तर: आमतौर पर एचसीजी ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, भ्रूण के दिल की स्कैनिंग और पैल्विक टेस्ट जैसे परीक्षणों से गर्भपात का निदान किया जाता है।

प्रश्न: गर्भावस्था के पहले सप्ताह के लक्षण क्या होते है?

उत्तर: गर्भावस्था के पहले सप्ताह में एक महिला थकान, उलटी जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकती है। इसके अलावा हाथ- पैरों में सूजन और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालाँकि, ऐसा ज़रूरी नहीं है की सभी महिलाओं को पहले सप्ताह में ही यह लक्षण नज़र आएं।

प्रश्न - क्या तनाव के कारण से गर्भपात हो सकता है?

उत्तर - तनाव से गर्भपात हो सकता है, हालाँकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गर्भावस्था के दौरान तनाव लेने से गर्भ में मौजूद बच्चे के विकास पर प्रभाव ज़रूर पड़ता है।

प्रश्न - गर्भपात के बाद गर्भधारण करने की कोशिश कब शुरू कर सकते है?

उत्तर - गर्भपात के बाद दोबारा गर्भवती होने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं है। जब डॉक्टर आपको बता दें कि अब आप शारीरिक रूप से दूसरी गर्भावस्था के लिए तैयार हैं, तो आप दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए कोशिश कर सकती हैं।